Monday, March 4, 2019

क्या सचमुच वो मेघना हो तुम?

क्या सचमुच वो मेघना हो तुम? 

लबालब भरा जिसमे अमृत रस हो
जो वर्षा करे प्रेम रस की
क्या सचमुच वो मेघना हो तुम?
आकाश का जो श्रृंगार है
जो प्रेमी की पुकार है
मेघ की गर्जना में दामिनी के साथ जो
भरदे समुंद्र तट को
क्या सचमुच वो मेघना हो तुम?
जो हर पायल को छनका दे
जो माती को महेका दे
जो मुग्ध कर दे मयूर को नृत्य पे
क्या सचमुच वो मेघना हो तुम?

Friday, February 22, 2019

मला तुला काहितरी सांगायचंय

मला तुला काहितरी सांगायचंय
अग कंटाळा येतो या जगात
मला तुझ्या ह्रदयात रहायचंय
या चंद्राला सांगा कुणी
मला त्याच्या ऐवजी पण तुलाच पहायचंय
मी कुठलाही सरकारी कागद घेतल नाही
मला माझ्या ओठा वर तुझ्या ओठांचं ठसा घयायचंय
अरे ऐक न !....
मला खरच तुला काहितरी सांगायचंय
किती रेशमी केश आहे ग तुझे
मला रोज यांच्याशींच खेळायचंय
अरे ये न ग मला 
प्रेमात प्रेमान प्रेमालाच प्रेमा विषयी सांगायचंय

अब हर घर से एक भगतसिंग आएगा

अब हर घर से एक भगतसिंग आएगा

फिर एक बिस्मिल उठेगा
फिर एक अश्फाक इंकलाब गायेगा
बड़ गए है दुश्मन मेरे हिंदुस्तान के
अब हर घर से एक भगतसिंग आएगा
चंद्रशेखर की आझादी अब हिंदुस्तान दोहरायेगा
खुन बहाया वतन का हमारे
अब खुन का बदला खून से लिया जायेगा
भाग सको तो भागो दुश्मन
अब हर घर से एक भगतसिंग आएगा
तुमने 20 मारे थे तुम्हारे सौ लेटे है
काफिरों याद रखना हिंदुस्तान के घर-घर में
वतन पर मरने-मारने वाले बेटे है
यहा चूडिय़ाें की खनखनाहट भी आझादी ही गाती है
एक मज़हब हो जाते हैं हम हिंदुस्तानी
जब बात हमारे वतन की आती है
तुमने सिर्फ हवा का छोटा झोका देखा है
अब ए हिंदुस्तान तुम हैं खुन का सैलाब दिखाएगा
मेरे वतन की मिट्टी की कसम अब चुन-चुन कर तुमसे बदला लिया जाएगा
ये वादा हैं एक हिंदुस्तानी का अब हर घर से एक भगतसिंग आएगा

Thursday, December 20, 2018

एक मासूम लड़की

एक लड़की जो बहुत मासूम है।
जिसका चेहरा बिच
सरोवर एक खामोश कमल है
उसकी आंंखे जो समंदर का राज रखती है
उसके होठ जो मोहब्बत की शराब रखतेे है
वो लड़की जो बहुत मासूम है जिसका चेहरा बीच सरोवर एक खामोश कमल है ।
उसकी जूूूल्फें तो इस कदर घायल करती है
अगर टकराए कभी हवा से तो हवा भी अपना रूख बदल लेेेेती है
उसके दोनो हाथों की हथेलीयाँ जब आपस में टकराती है तो मानो लगता हैै उसकेे होठो को छुने के लिए उसकी उगँलिया तक तरसती हैै
वो लड़की जो बहुत मासूम है
जिसका चेहरा बीच सरोवर एक खामोश कमल है
वो दोनो कान जो बीना झूमको के भी कुंदन लगते है
उसकी बाते जो बीच पाषाणोंं में मोहब्बत की गजल है
वो लड़की जो बहुत मासूम है
जिसका चेहरा बीच सरोवर एक खामोश कमल है